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शनिवार, 24 दिसंबर 2016

अस्तित्व, अनुभव तथा ज्ञान

साल्वाडोर डाली द्वारा

अनुभव रूपी अस्तित्व 

एक बात बहुत निश्चित है - अस्तित्व है।  वास्तव में केवल यही मेरे लिए निश्चित है।  मुझे और कोई ज्ञान नहीं है , और कोई ऐसा अनुभव नहीं है जो इतना निश्चित लगता हो।  बस कुछ है।  उस "कुछ" को में अस्तित्व इस शब्द से परिभाषित करता हूँ।  ये बस एक शब्द है जो उस निश्चितता का सूचक है।  अस्तित्व एक प्रक्रिया द्वारा गतिमान हो रहा है , उसे मैं अनुभवक्रिया कहूंगा, और फिर अनुभव यह शब्द इस प्रक्रिया का संज्ञा रूप है।  मैं कितना भी प्रयास करूँ , मैं इसका खंडन नहीं कर सकता , नकार नहीं सकता , और कोई भी ऎसा नहीं कर पायेगा। तो हम यहाँ एक बहुत दृढ़ आधार पर हैं। यह एक अच्छी शुरुआत है , शायद यहीं से कोई भी शुरुआत हो सकती है।

अस्तित्वनाद या अस्तित्व के परिवर्तन अनुभवक्रिया को जन्म देते हैं।  बस इतना ही कुछ है , बाकि सब कुछ विवरण मात्र है।  मुझसे मत पूछिये के ये अस्तित्व क्या चीज़ है, और उसमे ये नाद परिवर्तनादि हो क्यों रहा है , कैसे यह सब हो रहा है और क्यों ..... मुझे कोई ज्ञान नहीं इसका।  महान ऋषि और पंडित इस बारे में क्या कहते हैं ये जानने के लिए तत्वविज्ञान की कोई अच्छी किताब पढ़ लें।  मैं आपको आश्वासन देता हूँ की ये कोई नहीं जानता।