जैसा की हमने पिछले लेखों में देखा , अस्तित्व का कोई रहस्यमय गुण स्व को जन्म देता है। अब हम अस्तित्व के और भी अधिक रहस्यमय गुण का अन्वेषण करेंगे , जो है अनुभवक्रिया। यह अस्तित्व में होने वाली कोई यादृच्छिक प्रक्रिया मात्र नहीं है, इसमें कुछ रोचक गुण है। अनुभवक्रिया अस्तित्व के ऊपर संस्कार (छाप) बनाती है और विभिन्न संरचनाओं के रूप में अपना आत्मसंगठन भी करती है [८]। यह ऐसा कहने के बराबर होगा कि अस्तित्व अपना ही आत्मसंगठन करता है। दुसरे शब्दों में, वह रचयिता है। इस तरह जो संरचनाएं उभरती हैं वे रचना है।
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शनिवार, 31 दिसंबर 2016
अनुभव सृजन
जैसा की हमने पिछले लेखों में देखा , अस्तित्व का कोई रहस्यमय गुण स्व को जन्म देता है। अब हम अस्तित्व के और भी अधिक रहस्यमय गुण का अन्वेषण करेंगे , जो है अनुभवक्रिया। यह अस्तित्व में होने वाली कोई यादृच्छिक प्रक्रिया मात्र नहीं है, इसमें कुछ रोचक गुण है। अनुभवक्रिया अस्तित्व के ऊपर संस्कार (छाप) बनाती है और विभिन्न संरचनाओं के रूप में अपना आत्मसंगठन भी करती है [८]। यह ऐसा कहने के बराबर होगा कि अस्तित्व अपना ही आत्मसंगठन करता है। दुसरे शब्दों में, वह रचयिता है। इस तरह जो संरचनाएं उभरती हैं वे रचना है।
बीज शब्द:
आधारभूत प्रक्रिया,
चित्त,
मस्तिष्क,
रचना
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